النكاح من سنتي
इस्लाम में निकाह:
एक संपूर्ण गाइड
निकाह पर क़ुरआन की आयतें, सहीह हदीसें, उलेमा के उसूल और इस्लामी मार्गदर्शन: शादी के हलाल रास्ते की तलाश में हर मुस्लिम परिवार के लिए संकलित।
निकाह आपके दीन का आधा हिस्सा है
नबी मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया: “जब कोई व्यक्ति निकाह करता है, तो वह अपना आधा दीन पूरा कर लेता है।” (बैहक़ी)। इस्लाम में निकाह सिर्फ़ एक सामाजिक अनुबंध नहीं है, यह एक इबादत है, ईमान की तकमील है, और अल्लाह की रहमत है।
दुनिया भर के मुस्लिम परिवारों में शादी हमेशा ईमान, परिवार और समाज के मार्गदर्शन में होती आई है। Walima इन्हीं मूल्यों को डिजिटल दौर में सहेजने और मज़बूत करने के लिए बनाया गया है: एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म जहाँ जीवनसाथी की तलाश हर क़दम पर इस्लामी उसूलों का सम्मान करती है।
इस पेज पर वे क़ुरआनी आयतें, हदीसें और उलेमा का मार्गदर्शन संकलित है जो हमारे प्लेटफ़ॉर्म की इस्लामी बुनियाद हैं।
وَمِنْ آيَاتِهِ أَنْ خَلَقَ لَكُم مِّنْ أَنفُسِكُمْ أَزْوَاجًا لِّتَسْكُنُوا إِلَيْهَا وَجَعَلَ بَيْنَكُم مَّوَدَّةً وَرَحْمَةً ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
“और उसकी निशानियों में से यह है कि उसने तुम्हारे लिए तुम्हीं में से जोड़े बनाए, ताकि तुम उनके पास सुकून पाओ, और उसने तुम्हारे बीच मुहब्बत और रहमत रख दी। बेशक इसमें ग़ौर करने वालों के लिए निशानियाँ हैं।”
, सूरह अर-रूम 30:21
निकाह के बारे में अल्लाह क्या फ़रमाता है
निकाह, पति-पत्नी के अधिकारों और इस्लामी विवाह की पवित्रता पर क़ुरआन की प्रमुख आयतें।
وَأَنكِحُوا الْأَيَامَىٰ مِنكُمْ وَالصَّالِحِينَ مِنْ عِبَادِكُمْ وَإِمَائِكُمْ
"और तुममें से जो बे-निकाह हों उनका निकाह कर दो, और अपने नेक ग़ुलामों और बाँदियों का भी।"
📖 सूरह अन-नूर 24:32यह आयत निकाह को आसान बनाने का इलाही हुक्म है, अपने लिए और अपने समाज के भीतर। यही इस इस्लामी उसूल की बुनियाद है कि निकाह को आसान बनाया जाए, मुश्किल नहीं।
وَعَاشِرُوهُنَّ بِالْمَعْرُوفِ
"और उनके साथ भले तरीक़े से रहो।"
📖 सूरह अन-निसा 4:19क़ुरआन हुक्म देता है कि पति अपनी पत्नियों के साथ मेहरबानी और इज़्ज़त से पेश आएँ। इस्लामी पारिवारिक क़ानून में यह सबसे ज़्यादा उद्धृत आयतों में से एक है, जो आपसी सम्मान को निकाह की बुनियाद के रूप में स्थापित करती है।
هُنَّ لِبَاسٌ لَّكُمْ وَأَنتُمْ لِبَاسٌ لَّهُنَّ
"वे तुम्हारे लिए लिबास हैं और तुम उनके लिए लिबास हो।"
📖 सूरह अल-बक़रा 2:187इस्लामी निकाह का सबसे ख़ूबसूरत वर्णनों में से एक, पति-पत्नी एक-दूसरे के लिए लिबास की तरह: हिफ़ाज़त, गर्माहट, पर्दे और क़ुरबत का ज़रिया।
وَآتُوا النِّسَاءَ صَدُقَاتِهِنَّ نِحْلَةً
"और औरतों को उनका महर ख़ुशी से (फ़र्ज़ समझकर) अदा करो।"
📖 सूरह अन-निसा 4:4महर दूल्हे की ओर से दुल्हन के लिए एक इलाही फ़र्ज़ है। यह पूरी तरह उसका है, उसके परिवार का नहीं, और उसकी सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता।
رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ
"ऐ हमारे रब, हमें हमारी बीवियों और औलाद से आँखों की ठंडक अता फ़रमा और हमें परहेज़गारों का इमाम बना दे।"
📖 सूरह अल-फ़ुरक़ान 25:74यह नेक लोगों की प्यारी दुआ है, जिसमें अल्लाह से सिर्फ़ जीवनसाथी नहीं, बल्कि ऐसे जीवनसाथी और औलाद माँगी जाती है जो ख़ुशी का ज़रिया और नेकी का सबब बनें। याद करने और दोहराने लायक़ दुआ।
وَإِن يَتَفَرَّقَا يُغْنِ اللَّهُ كُلًّا مِّن سَعَتِهِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ وَاسِعًا حَكِيمًا
"और अगर वे दोनों अलग हो जाएँ, तो अल्लाह अपनी कुशादगी से हर एक को बेनियाज़ कर देगा। और अल्लाह बड़ी वुसअत वाला, हिकमत वाला है।"
📖 सूरह अन-निसा 4:130जुदाई की बात करते हुए भी क़ुरआन हमें अल्लाह की रहमत और हिकमत याद दिलाता है। तवक्कुल, यानी अल्लाह पर भरोसा, रिश्ते के सफ़र के हर चरण की बुनियाद है।
निकाह के बारे में सुन्नत
निकाह, जीवनसाथी के चुनाव और शादी की बरकतों पर पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की सहीह हदीसें।
النِّكَاحُ مِنْ سُنَّتِي، فَمَنْ لَمْ يَعْمَلْ بِسُنَّتِي فَلَيْسَ مِنِّي
"निकाह मेरी सुन्नत है। जो मेरी सुन्नत पर अमल नहीं करता, वह मुझसे नहीं।"
इब्न माजा | प्रमाणित
इस्लाम में निकाह सिर्फ़ अनुशंसित नहीं है, नबी ﷺ ने इसे स्पष्ट रूप से अपनी सुन्नत का हिस्सा बताया है। सही नीयत से निकाह की तलाश करना अपने आप में एक इबादत है।
إِذَا تَزَوَّجَ الْعَبْدُ فَقَدِ اسْتَكْمَلَ نِصْفَ الدِّينِ
"जब अल्लाह का बंदा निकाह करता है, तो वह अपना आधा दीन पूरा कर लेता है।"
बैहक़ी | हदीस
निकाह बड़े गुनाहों से बचाता है और नेक ज़िंदगी की बुनियाद तैयार करता है। "आधा दीन" पूरा करने का मतलब उस हिफ़ाज़त से है जो निकाह नफ़्स की ख़्वाहिशों के ख़िलाफ़ देता है।
تُنْكَحُ الْمَرْأَةُ لِأَرْبَعٍ: لِمَالِهَا وَلِحَسَبِهَا وَجَمَالِهَا وَلِدِينِهَا، فَاظْفَرْ بِذَاتِ الدِّينِ تَرِبَتْ يَدَاكَ
"औरत से चार चीज़ों की वजह से निकाह किया जाता है: उसके माल, उसके ख़ानदान, उसकी ख़ूबसूरती और उसके दीन की वजह से। तुम दीनदार को चुनो, [वरना] तुम्हारे हाथ ख़ाक में लिपटें।"
बुख़ारी और मुस्लिम | सहीह
यह हदीस जीवनसाथी की तलाश कर रहे पुरुषों और महिलाओं दोनों पर समान रूप से लागू होती है। दीनदारी सफल इस्लामी विवाह की सबसे भरोसेमंद बुनियाद है। Walima का अनुकूलता एल्गोरिदम इसी उसूल को प्राथमिकता देता है।
لَا نِكَاحَ إِلَّا بِوَلِيٍّ
"वली (अभिभावक) के बिना कोई निकाह नहीं।"
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी | सहीह
वली, आम तौर पर दुल्हन के पिता या पुरुष अभिभावक, इस्लामी फ़िक़्ह के ज़्यादातर मकतबों में सही निकाह के लिए ज़रूरी है। Walima सदस्यों को हर चरण में वली को शामिल रखने के लिए प्रोत्साहित करता है, और आपके बायोडाटा में वली या अभिभावक को उस व्यक्ति के रूप में दर्ज किया जा सकता है जिससे परिवार संपर्क करें।
خَيْرُكُمْ خَيْرُكُمْ لِأَهْلِهِ، وَأَنَا خَيْرُكُمْ لِأَهْلِي
"तुममें सबसे बेहतर वह है जो अपने घरवालों के लिए सबसे बेहतर है, और मैं अपने घरवालों के लिए तुम सबमें सबसे बेहतर हूँ।"
तिर्मिज़ी | सहीह
नबी ﷺ ने घर के भीतर नरमी और मेहरबानी की मिसाल पेश की। अपनी पत्नी और परिवार के प्रति एक पुरुष का व्यवहार ही उसके चरित्र का सबसे सच्चा पैमाना है। संभावित जीवनसाथी को परखने का यह एक बुनियादी उसूल है।
أَعْلِنُوا هَذَا النِّكَاحَ، وَاجْعَلُوهُ فِي الْمَسَاجِدِ، وَاضْرِبُوا عَلَيْهِ بِالدُّفُوفِ
"इस निकाह का ऐलान करो, इसे मस्जिदों में करो, और इस पर दफ़ बजाओ।"
तिर्मिज़ी | हदीस
इस्लाम में निकाह एक सार्वजनिक, ख़ुशी से मनाया जाने वाला सामुदायिक काम है, कोई निजी समझौता नहीं। ऐलान पर ज़ोर निकाह को किसी भी तरह के छिपे रिश्ते से अलग करता है, और इस्लाम के इस नज़रिए को दर्शाता है कि निकाह पूरे समाज के लिए बरकत है।
सही इस्लामी निकाह की ज़रूरी शर्तें
इस्लामी उलेमा की सहमति के अनुसार, एक मान्य निकाह के लिए इन शर्तों का पूरा होना ज़रूरी है।
ईजाब और क़बूल (प्रस्ताव और स्वीकृति)
निकाह के अनुबंध के लिए एक पक्ष से स्पष्ट प्रस्ताव (ईजाब) और दूसरे पक्ष से साफ़ स्वीकृति (क़बूल) ज़रूरी है, एक ही बैठक में, गवाहों के सामने।
الإيجاب والقبول
दो मुस्लिम गवाह (शाहिदैन)
निकाह के अनुबंध के समय कम से कम दो वयस्क, समझदार मुस्लिम गवाह मौजूद होने चाहिए। उनकी मौजूदगी निकाह को मान्य बनाती है और सार्वजनिक ऐलान की सुन्नत पूरी करती है।
الشاهدان
दुल्हन का अभिभावक (वली)
दुल्हन के वली, यानी उसके पिता या सबसे क़रीबी पुरुष अभिभावक, की निकाह के लिए सहमति ज़रूरी है। शाफ़ई, मालिकी और हंबली मकतबों में यह अनिवार्य है, और हनफ़ी मकतब में पुरज़ोर अनुशंसित।
الولي
महर (अनिवार्य उपहार)
दूल्हे को दुल्हन को महर, यानी सच्चे मूल्य का उपहार, देना या देने का वादा करना ज़रूरी है। यह सिर्फ़ दुल्हन का होता है और उसकी सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता। इसकी रक़म निकाह से पहले तय हो जानी चाहिए।
المهر
दुल्हन की सहमति
दुल्हन की निकाह के लिए स्वतंत्र और स्पष्ट सहमति ज़रूरी है। महिला की स्वेच्छा से दी गई सहमति के बिना किया गया निकाह इस्लामी शरीयत में अमान्य है। इस हक़ को परिवार का कोई भी सदस्य नहीं छीन सकता।
رضا الزوجة
कोई रुकावट न होना
जोड़ा निषिद्ध रिश्तों (महरम) के दायरे में नहीं आना चाहिए। साथ ही, कोई पुरुष एक समय में चार से अधिक महिलाओं से विवाहित नहीं हो सकता, और मुस्लिम महिला सिर्फ़ मुस्लिम पुरुष से ही निकाह कर सकती है।
عدم الموانع
Walima इस्लामी मार्गदर्शन को कैसे लागू करता है
Walima की हर सुविधा विवाह के इन बुनियादी इस्लामी उसूलों के अनुरूप बनाई गई है।
सत्यापित पहचान (अमानत)
इस्लाम हर मामले में ईमानदारी और भरोसेमंदी की माँग करता है। हर नई प्रोफ़ाइल के लिए अनिवार्य, Walima का फ़ेस सत्यापन और टीम समीक्षा प्रोफ़ाइलों को असली रखने में मदद करते हैं, जिससे रिश्ते की प्रक्रिया में अमानत (भरोसे) का उसूल पूरा होता है।
परिवार की भागीदारी (सिला-रहमी)
इस्लाम पारिवारिक रिश्तों को निकाह के केंद्र में रखता है। Walima पर माता-पिता या अभिभावक अपने बच्चे की प्रोफ़ाइल प्रबंधित कर सकते हैं, और सदस्य अपना बायोडाटा परिवार के साथ साझा कर सकते हैं, ताकि माता-पिता और अभिभावक रिश्ते की प्रक्रिया में सिर्फ़ दर्शक नहीं, बल्कि भागीदार हों।
हया और गोपनीयता
हया, यानी शर्म और लज्जा, एक बुनियादी इस्लामी गुण है। Walima के गोपनीयता नियंत्रण से सदस्य ठीक-ठीक तय कर सकते हैं कि उनकी प्रोफ़ाइल, फ़ोटो और संपर्क विवरण कौन देखे।
न्याय और निष्पक्षता (अद्ल)
इस्लामी निकाह में निष्पक्षता ज़रूरी है, महर में, बातचीत में और आपसी सम्मान में। Walima का प्लेटफ़ॉर्म दोनों पक्षों के लिए बराबरी, सम्मान और व्यवस्था वाला माहौल बनाने के लिए तैयार किया गया है।
आपसी सहमति (रज़ा)
इस्लाम में दोनों पक्षों की स्वतंत्र सहमति के बिना कोई निकाह मान्य नहीं है। Walima मैचिंग की प्रक्रिया में कभी दबाव, जल्दबाज़ी या चालाकी नहीं करता। हर क़दम स्वैच्छिक है।
भलाई की तलाश (इस्तिख़ारा)
हम हर सदस्य को कोई बड़ा फ़ैसला लेने से पहले सलात-उल-इस्तिख़ारा पढ़ने की सलाह देते हैं। Walima एक ज़रिया है, सही जीवनसाथी ढूँढने में असली रहनुमा अल्लाह है।
चरण-दर-चरण: निकाह तक का हलाल रास्ता
नीयत से निकाह तक, विवाह की प्रक्रिया के लिए एक व्यावहारिक इस्लामी गाइड।
चरण 1: नीयत करें और दुआ करें
सच्ची नीयत से शुरुआत करें। क्या आप अल्लाह को राज़ी करने, अपना दीन पूरा करने और नेक परिवार बनाने के लिए निकाह चाहते हैं? अपनी नीयत साफ़ रखें, फिर दुआ करें, ख़ास तौर पर और लगातार।
दलील: "कामों का दारोमदार नीयतों पर है, और हर व्यक्ति को वही मिलेगा जिसकी उसने नीयत की।" नबी ﷺ (बुख़ारी)
चरण 2: शुरू से ही अपने परिवार को शामिल करें
अपने माता-पिता या वली को बताएँ कि आप निकाह के लिए तैयार हैं। उनकी भागीदारी शुरू से हो, आख़िरी मंज़ूरी के तौर पर नहीं, यही इस्लामी तरीक़ा है। वे इस प्रक्रिया में समझदारी, जान-पहचान और बरकत लाते हैं।
दलील: "वली के बिना कोई निकाह नहीं।" नबी ﷺ (अबू दाऊद)
चरण 3: सही मापदंडों से तलाश करें
दौलत, रूप या हैसियत से ऊपर दीनदारी, चरित्र और पारिवारिक मूल्यों को प्राथमिकता दें। Walima जैसे सत्यापित माध्यमों का उपयोग करें, जहाँ हर नई प्रोफ़ाइल लाइव होने से पहले फ़ेस सत्यापन और समीक्षा से गुज़रती है।
दलील: "दीनदार को चुनो।" नबी ﷺ (बुख़ारी और मुस्लिम)
चरण 4: जायज़ पहली नज़र (नज़र)
इस्लाम संभावित जीवनसाथी को निकाह का वादा करने से पहले एक-दूसरे को देखने की इजाज़त देता है। यह इस्लामी हक़ है, कोई रियायत नहीं, और यह परिवारों की जानकारी और मौजूदगी में होना चाहिए।
दलील: "उसे देख लो, क्योंकि इससे तुम्हारे बीच मुहब्बत पैदा होने की संभावना ज़्यादा है।" नबी ﷺ (तिर्मिज़ी)
चरण 5: परिवार की निगरानी में बातचीत
संभावित जोड़े के बीच बातचीत मक़सद वाली, सम्मानजनक और, आदर्श रूप से, परिवार की जानकारी में होनी चाहिए। Walima पर आप संपर्क जानकारी साझा करने से पहले अपना बायोडाटा वली और परिवार के साथ साझा कर सकते हैं। परिवारों के जुड़ने से पहले निजी, लंबी मैसेजिंग से बचें।
दलील: "कोई पुरुष किसी (ग़ैर-महरम) महिला के साथ अकेले में न हो।" नबी ﷺ (बुख़ारी)
चरण 6: सलात-उल-इस्तिख़ारा पढ़ें
अंतिम फ़ैसला लेने से पहले रहनुमाई की नमाज़ पढ़ें। अल्लाह से दुआ करें कि जो आपके लिए भला है उसे आसान कर दे, और जो नुक़सानदेह है उसे दूर कर दे। फिर उसके जवाब पर भरोसा रखें, चाहे वह किसी भी रूप में आए।
दलील: "तुममें से जो कोई किसी काम का इरादा करे, वह दो रकअत नफ़्ल नमाज़ पढ़े।" नबी ﷺ (बुख़ारी)
चरण 7: निकाह
जब दोनों परिवार सहमत हों, तो किसी योग्य इमाम या इस्लामी आलिम के साथ निकाह की व्यवस्था करें। सुनिश्चित करें कि महर तय हो, गवाह मौजूद हों और निकाहनामे पर दस्तख़त हों। निकाह का सार्वजनिक ऐलान करें और वलीमा की दावत से ख़ुशी मनाएँ।
दलील: "इस निकाह का ऐलान करो और इस पर दफ़ बजाओ।" नबी ﷺ (तिर्मिज़ी)
निकाह से जुड़े इस्लामी सवाल-जवाब
निकाह, वली, महर और विवाह के इस्लामी तरीक़े पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल, क़ुरआन और हदीस के हवालों के साथ।
हाँ, सत्यापित, परिवार की भागीदारी वाले मैट्रिमोनी प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल इस्लाम में जायज़ है, बशर्ते प्रक्रिया इस्लामी मर्यादा बनाए रखे: परिवार की जानकारी के बिना निजी तौर पर स्त्री-पुरुष की बातचीत न हो, पहचान सत्यापित हो और वली शामिल हो।
उलेमा ने कहा है कि परिचय का तरीक़ा, चाहे परिवार के ज़रिए हो, समुदाय के ज़रिए या किसी सत्यापित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए, असल मुद्दा नहीं है। मायने यह रखता है कि प्रक्रिया इस्लामी अदब, परिवार की भागीदारी और निकाह की नीयत के साथ हो।
हाँ, इस्लाम निकाह पर विचार कर रहे पुरुष और महिला को एक-दूसरे को देखने और सार्थक बातचीत करने की इजाज़त देता है। नबी ﷺ ने इसे प्रोत्साहित किया: “उसे देख लो, क्योंकि इससे तुम्हारे बीच मुहब्बत पैदा होने की संभावना ज़्यादा है।” (तिर्मिज़ी)
लेकिन यह होना चाहिए: (1) वली या परिवार की जानकारी में, (2) ख़ास तौर पर निकाह पर विचार करने के मक़सद से, और (3) हया बनाए रखते हुए। परिवारों के जुड़ने से पहले निजी, लंबी, रोमांटिक मैसेजिंग को हतोत्साहित किया जाता है।
वली, यानी दुल्हन का अभिभावक, आम तौर पर उसके पिता, इस्लामी निकाह में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। बहुसंख्यक उलेमा (शाफ़ई, मालिकी, हंबली) का मत है कि वली के बिना निकाह अमान्य है। हनफ़ी मकतब इसे मान्य मानता है, लेकिन वली की पुरज़ोर सिफ़ारिश करता है।
नबी ﷺ ने फ़रमाया: “वली के बिना कोई निकाह नहीं।” (अबू दाऊद, सहीह)
अगर पिता मौजूद न हों, स्वर्गवासी हों या उपलब्ध न हों, तो यह भूमिका अगले सबसे क़रीबी पुरुष रिश्तेदार (दादा, भाई, चाचा) को मिलती है, या कुछ मामलों में स्थानीय इस्लामी प्राधिकारी (क़ाज़ी) वली के रूप में काम कर सकते हैं।
इस्लामी शरीयत में महर की कोई तय न्यूनतम या अधिकतम सीमा नहीं है। उलेमा इस पर सहमत हैं कि यह सच्चे मूल्य की चीज़ होनी चाहिए, इतनी कि उसका महत्व हो, लेकिन इतनी ज़्यादा नहीं कि दूल्हे के लिए मुश्किल पैदा हो।
नबी ﷺ ने अपनी पत्नियों से अलग-अलग मात्रा के महर के साथ निकाह किया, लोहे की अंगूठी से लेकर खजूर और सोने तक। अहमियत आपसी सहमति और सच्चाई की है, किसी ख़ास रक़म की नहीं।
वलीमा, यानी निकाह के बाद की दावत, सुन्नत-ए-मुअक्कदा (ताकीदी सुन्नत) है। नबी ﷺ ने फ़रमाया: “वलीमा में शामिल होना हर मुसलमान का हक़ है।” उन्होंने ख़ुद अपने हर निकाह के बाद वलीमा किया।
हालाँकि उलेमा में इस पर मतभेद है कि यह वाजिब है या पुरज़ोर अनुशंसित, लेकिन सहमति इस पर है कि वलीमा होना चाहिए, भले ही सादगी से, जो भी खाना उपलब्ध हो उसके साथ।
इस्लामी शरीयत वली और दुल्हन दोनों के हक़ों में संतुलन रखती है। वली की भागीदारी ज़रूरी है, लेकिन उसके पास इनकार करने का असीमित अधिकार नहीं है। अगर कोई वली बिना उचित कारण किसी मुनासिब निकाह को रोकता है, तो मामला किसी स्थानीय इस्लामी आलिम या प्राधिकारी के पास ले जाया जा सकता है।
नबी ﷺ ने फ़रमाया: “अगर तुम्हारे पास कोई ऐसा व्यक्ति आए जिसके दीन और चरित्र से तुम संतुष्ट हो, तो उससे निकाह कर दो। अगर तुम ऐसा नहीं करोगे, तो ज़मीन में बड़ा फ़साद होगा।” (तिर्मिज़ी)
Walima को शुरू से ही इस्लामी निकाह के उसूलों के इर्द-गिर्द बनाया गया है। ख़ास सुविधाओं में शामिल हैं:
परिवार की भागीदारी: आपके बायोडाटा में वली की जानकारी हो सकती है, और आप इसे लिंक या QR कोड से परिवार के साथ साझा कर सकते हैं।
हया के नियंत्रण: सदस्य तय करते हैं कि उनकी फ़ोटो और प्रोफ़ाइल विवरण कौन देखे।
मक़सद वाली बातचीत: प्लेटफ़ॉर्म निकाह पर विचार के लिए बनाया गया है, हल्की-फुल्की सामाजिक बातचीत के लिए नहीं।
फ़ेस सत्यापन: हर नई प्रोफ़ाइल लाइव सेल्फ़ी जाँच और टीम समीक्षा से गुज़रती है, जिससे अमानत (भरोसे) का उसूल पूरा होता है।
बेवजह स्त्री-पुरुष संपर्क नहीं: प्रोफ़ाइल सिर्फ़ निकाह के मक़सद से, उपयुक्त लिंग के सदस्यों के साथ ही साझा की जाती हैं।
निकाह के बारे में इस्लामी उलेमा क्या कहते हैं
इस्लामी विवाह के महत्व पर प्राचीन और समकालीन उलेमा की चुनी हुई बातें।
इमाम अल-ग़ज़ाली
क्लासिकी आलिम
"निकाह एक साझेदारी है, इसमें सब्र, मेहरबानी और यह समझ चाहिए कि आपका जीवनसाथी अल्लाह की दी हुई एक अमानत है।"
इब्न क़य्यिम अल-जौज़िय्या
हंबली आलिम
"निकाह अल्लाह की सबसे बड़ी नेमतों में से एक है। यह मोमिन के लिए पनाह, रहमत और रूहानी तकमील का ज़रिया है।"
शेख़ इब्न उसैमीन
समकालीन आलिम
"उसे चुनो जिसके पास दीन और अच्छा चरित्र हो। ख़ूबसूरती ढल जाती है, दौलत बदल जाती है, लेकिन इंसान का अल्लाह से रिश्ता ही निकाह में उसके चरित्र को तय करता है।"
Walima का इस्लामी अनुपालन
Walima का प्लेटफ़ॉर्म इस्लामी निकाह के मानकों के अनुरूप कैसे है, और उनके उल्लंघन से कैसे बचता है।
Walima क्या करता है
- ✓सदस्यों को बायोडाटा में वली की जानकारी जोड़ने और उसे परिवार के साथ साझा करने देता है
- ✓लाइव सेल्फ़ी से फ़ेस सत्यापन और टीम समीक्षा के ज़रिए हर नई प्रोफ़ाइल सत्यापित करता है
- ✓सदस्यों को यह सीमित करने देता है कि उनकी फ़ोटो और प्रोफ़ाइल कौन देखे
- ✓बातचीत को निकाह पर विचार के लिए बनाता है, हल्की-फुल्की चैट के लिए नहीं
- ✓पहले चरण से ही परिवार की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है
- ✓सभी सदस्यों के लिए इस्लामी मार्गदर्शन सामग्री (यह पेज) उपलब्ध कराता है
- ✓सिर्फ़ निकाह के मक़सद से लिंग के अनुसार अलग प्रोफ़ाइल रखता है
- ✓सदस्यों की गोपनीयता का सम्मान करता है, कोई डेटा तीसरे पक्ष को बेचा या साझा नहीं किया जाता
Walima क्या नहीं करता
- ✗स्त्री-पुरुष के बीच हल्की-फुल्की, ग़ैर-वैवाहिक सामाजिक बातचीत को बढ़ावा देना
- ✗प्लेटफ़ॉर्म पर असत्यापित या गुमनाम प्रोफ़ाइल की अनुमति देना
- ✗इस्लामी हया के मानकों का उल्लंघन करने वाली सामग्री को बढ़ावा देना या अनुमति देना
- ✗मैचिंग की प्रक्रिया में जल्दबाज़ी, दबाव या चालाकी पैदा करना
- ✗सदस्यों का डेटा विज्ञापनदाताओं या तीसरे पक्ष के साथ साझा करना
- ✗सदस्यों को वली/परिवार की भागीदारी की प्रक्रिया को दरकिनार करने देना
- ✗ख़ुद को "डेटिंग ऐप" के रूप में पेश करना या ग़ैर-वैवाहिक रिश्तों को बढ़ावा देना
- ✗प्रक्रिया के किसी भी चरण में सदस्य की सहमति को नज़रअंदाज़ करना